75 वे गणतन्त्र दिवस के पावन राष्ट्रीय पर्व पर काशिफ पब्लिक स्कूल के विशाल और भव्य प्रगण में राष्ट्र भक्ति से ओत प्रोत कार्यक्रमों के साथ गणतन्त्र दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया

बच्चों द्वारा देश प्रेम से ओतप्रोत कार्यक्रम ने उपस्थित गणमान्य नागरिको अभिभावकों व जन समुदाय का मन मोह लिया

जनवरी 28, 2024 - 21:19

द स्वार्ड ऑफ इंडिया

बाराबंकी : कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की चैयरमैन तथा पूर्वमन्त्री श्रीमती शादाब फातिमा जी तथा विद्यालय के प्रबंधक निदेशक श्री एस एन ० हैदर के ध्वाजारोहण के साथ हुआ ।

तदुपरान्त विद्यालय की चैयरमैन श्रीमती शादाब फातिमा ने अपने उदबोधन में कहा कि 26 जनवरी के डी दिन संविधान को लागू करने का एक बड़ा कारण यह था कि कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन मे रावी नदी के तट पर पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताब पारित किया गया था भारत लोकतन्त्र की माँ है

और इम विकसित भारत का निर्माण तभी कर सकते है जब प्रारूप समिति के अध्यक्ष डा0 भीमराव अम्बेदकर जी के विकसित व श्रेष्ठ भारत के निर्माण के स्वप्न को पूर्ण करने के लिए आगे बढ़कर कठिनाइयों का सामना करें ।

इसके उपरान्त बच्चों द्वारा देश प्रेम से ओतप्रोत कार्यक्रम ने उपस्थित गणमान्य नागरिको अभिभावकों व जन समुदाय का मन मोह लियासर्वप्रथम ऐसा देश है मेरा के माध्यम से गाँव खेत खलिहानों तथा मिट्टी की सोधी खुशबू ने दर्शकों को भाव विभोर कर करतल ध्वनि के लिए बाध्य कर दिया।

"माँ तुझे सलाम

गीत पर नृत्य ने सभी का मन मोह लिया तदुपरान्त नन्हे -मुन्नो जिसमे पी0 जी0 व फस्ट के बच्चों ने

मैं निकला गडडी लेकर" पर जोरदार प्रस्तुति दी अभिभावकों ने इसकी भूरि भूरि प्रशंसा की और बच्चों का करतल ध्वनि से उत्साहवर्द्धन किया 

उसके उपरान्त पृथ्वी को ग्लोबल वार्मिंग के खतरों से बचाने के लिए कक्षा प्रथम से कक्षा पाँच के बच्चों ने सामूहिक रूप से एक कघु नाटिका प्रस्तुत कर लोगो को प्रेरणादायक संदेश भी दिया अक्षत अन्वी रमशा परवीन , आराध्या ने लघु भाषण व कविताओं के माध्यम से लोगों का ध्यान आकर्षित किया ।

अन्त मे पी0 जी0 व प्रथम के नन्हे-मुन्नो बच्चों ने परियो के नृत्य व बम बम भोले से दर्शकों का मन मोह लिया। उपस्थित जन समुदाय व अभिभावकों ने करकल ध्वनि से बच्चों का उत्साहबर्द्धन किया ।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानचार्य राकेश कुमार दुबे ने 75 वे गणतंत्र दिवस पर लोगों को शुभकामना देते हुए कहा कि 15 अगस्त 1947 को आजादी प्राप्त करने के बाद इमें ऐसे दस्तावेज की आवश्यकता थी जिसके अनुसार हम अपने देश को चला सकें इसलिए डा0 राजेन्द्र प्रसाद जो संविधान सभा के अध्यक्ष थे, के नेतृत्व मे डा0 भीमराव अम्बेदकर जो प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे, के निर्देशानुसार सविधान का निर्माण 26 नवम्बर 1949 को हो चुका था किन्तु 26 जनवरी 1950 को इसको लागू किया गया वर्तमान में इसको तैयार होने मे 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन का समय तथा लगभग 64 लाख रूपये व्यय हुए थे। यह दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। 

कार्यक्रम के सफल प्रस्तुतिकरण संचालन संगठन व मंचन मे विद्यालय परिवार के सभी कर्मियों, शिक्षक, शिक्षिकाओं यधा हर्ष, फैजान, आयशा, अनामिका, प्रिया सोनम, शीबू, आशु, आशा, अंशू आदि का

सराहनीय योगदान रहा।

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