पीएम किसान सम्मान की 16वीं किस्त जारी होने का किसानों को दिखाया सजीव प्रसारण

जायद फसलों की बुआई का समय वैसे तो पिछले माह से ही शुरू हो गया है

फ़रवरी 28, 2024 - 22:34

द स्वार्ड ऑफ इंडिया

कानपुर। चंद्रशेखर आजाद प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के कृषि विज्ञान केंद्र दलीपनगर में प्रधानमंत्री कृषक सम्मान निधि की 16वीं जारी होने के सजीव प्रसारण के साथ ही एक गोष्ठी का आयोजन कर समसमयिक जानकारियां दी गयी। योजना के अंतर्गत आज़ 11 करोड़ से ज्यादा किसानों को अब तक 2.80 लाख करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं।

अब तक पात्र किसानों को 15 किस्त मिल चुकी हैऔर आज 16वीं किस्त जारी की गयी। कार्यक्रम में ज्योंति, अनूपपुर, मझियार, सहतवनपुरवा से आये 140 कृषकों एवम कृषक महिलाओं ने प्रतिभाग किया। कृषकों से वार्ता करते केंद्र के प्रभारी डॉ अजय कुमार सिंह ने कहा कृषि में रखरखाव, देखभाल का अपना अलग महत्व है।

जायद फसलों की बुआई का समय वैसे तो पिछले माह से ही शुरू हो गया है परंतु इस वर्ष गिरते तापमान के चलते कद्दूवर्गीय फसल तरबूज, खरबूज, लौकी, टिन्डा, कद्दू, करेला आदि के बीजों की बुआई यदि सीधे -सीधे खेतों में नदी किनारे की गई हो तो अंकुरण में गिरावट आ सकता है। cucurbitaceous सब्जियों को मानव आहार का एक अभिन्न अंग माना जाता है। इन्हें बेल वाली सब्जियों के नाम से भी जाना जाता है

जैसे – लौकी, खीरा, तोरई, करेला, कद्दू, तरबूज एवं खरबूज की खेती गर्मी के मौसम में आसानी से की जा सकती है। इन सब्जियों की अगेती खेती करके किसानों द्वारा अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। पोषण की दृष्टि से यह बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें आवश्यक विटामिन, खनिज तत्व पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं जो हमें स्वस्थ रखने में Assistantसिद्ध होते हैं। कद्दूवर्गीय सब्जियों की उपलब्धता वर्ष में आठ से दस महीने तक रहती है।डॉ खलील खान ने बताया की कद्दूवर्गीय सब्जियों की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है।

लेकिन दुमट व sandy दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है क्योंकि इसमें जल निकास अच्छी तरह से हो जाता है। मिट्टी में organic तत्व पर्याप्त मात्रा में हो साथ ही पीएच मान करीब 6 से 7.5 के मध्य हो। इस अवसर पर डॉक्टर निमिषा अवस्थी सहित अन्य वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

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