अमेठी में कांग्रेस फ्रंटफुट तो भाजपा बैकफुट पर: कांग्रेस

अमेठी में इस बार कांग्रेस ने स्मृति ईरानी के साथ खेला कर दिया। राहुल गांधी को चुनाव लडने के लिए ललकारने की रणनीति भाजपा के लिए उल्टा पड़ गई

मई 11, 2024 - 17:49
अमेठी में कांग्रेस फ्रंटफुट तो भाजपा बैकफुट पर:  कांग्रेस
स्मृति ईरानी

लखनऊ। अमेठी में इस बार कांग्रेस ने स्मृति ईरानी के साथ खेला कर दिया। राहुल गांधी को चुनाव लडने के लिए ललकारने की रणनीति भाजपा के लिए उल्टा पड़ गई।अब यह चर्चा आम होने लगी है कि जो स्मृति ईरानी राहुल को चुनौती दे रही थी वह उनके हनुमान किशोरी लाल शर्मा से मिल रही कड़ी टक्कर की वजह से बैकफुट पर आ गई हैं।

दरअसल गांधी परिवार ने रायबरेली और अमेठी में अपने भावनात्मक रिश्ते को जिस तरह से जनमानस के साथ जोड़ कर रखा है उसे यह चुनाव दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों में एकतरफा होता दिखाई दे रहा है।

अमेठी में कांग्रेस ने इस लड़ाई को जनता बनाम स्मृति ईरानी बना दिया है। जिस तरह से कांग्रेस प्रत्याशी किशोरी लाल शर्मा का काफिला बड़ा होता जा रहा है और प्रियंका गांधी की मौजूदगी से आक्रामक हुआ है ।

उससे यही आभास होता है कि आखिर में कांग्रेस पार्टी इस चुनावी बाजी को एकतरफा बना कर ही दम लेगी। भाजपा जहां राम मंदिर का जाप करने और पाकिस्तान के विरुद्ध बोलकर हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण करने की फिराक में है।

 वहीं कांग्रेस पार्टी स्मृति ईरानी के के कार्यकाल में जनप्रतिनिधियों के साथ बदसलूकी और जनता के बीच स्मृति ईरानी की घमंडी भाषा को लेकर मुखर है। आम जनमानस की अगर बात करें तो जनता स्थानीय मुद्दों और विकास के मामलों को लेकर स्वाल़ पूछती नजर आ रही है।

 राहुल गांधी के सांसद रहते जिस विकास कार्यों को भाजपा सांसद स्मृति ईरानी ने आगे नहीं बढ़ाया या फिर बंद कर दिया उनको लेकर वोटर में खासा रोष देखने को मिल रहा है।संजय गांधी अस्पताल मामला, ट्रिपल आईटी,मेगा फूड पार्क,रेलवे नीर प्लांट,हिंदुस्तान पेपर मिल,ऊंचाहार -अमेठी - शाहगंज को जोड़ने वाली रेलवे लाइन आदि कुछ ऐसे ज्वलंत मामले हैं जो अब भाजपा के लिए गले की फांस बनते नजर आ रहे हैं।

 अमेठी के चुनाव में खास बात यह नजर आई के वोटर स्थानीय मुद्दों को लेकर चर्चा कर रहा है और प्रश्न पूछ रहा है। अमेठी के स्थानीय युवा वोटर रामवरण यादव बेरोजगारी को लेकर चिंतित हैं और सत्ता धारियों से स्वाल पूछ रहे हैं।

अरुण मिश्रा महंगाई को अहम मुद्दा मानते हैं।योगेंद्र किसानों की समस्याओं को लेकर मुखर हैं। परवेज़ मनरेगा में दिहाड़ी बढ़ाने की बात करते हैं।मजदूर नेता शाहनवाज मजदूरों के हकों को लेकर भाजपा से स्वाल पूछ रहे हैं।

जनता जिस तरह से स्थानीय मुद्दों और सामाजिक उत्थान के विषयों को लेकर प्राथमिकता से उठा रही है इसे हिंदुस्तान के लोकतंत्र में सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा सकता है।बहरहाल जिस तरह से कांग्रेस ने अमेठी में चुनावी अभियान को स्कारात्मक धारा के साथ आगे बढ़ाया है।

 उससे विरोधी पक्ष असहाय नजर आने लगा है।अंतिम नतीजा जो भी हो लेकिन वर्तमान में जहां इंडिया गठबंधन चुनावी पिच पर फ्रंटफुट में खेलता नज़र आ रहा है वहीं भाजपा बैकफुट पर संघर्ष करती नजर आ रही है।

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