15 सालो से वैरीकोज वेन्स समस्या से पिडीत मरीज के पैर बचाने में डॉक्टर को मिली सफलता

• अपोलो स्पेक्ट्रा कानपूर के डॉ. अचिंत्य शर्मा हर दिन वैरिकोज वेन्स से पिडीत ३-४ महिला और १ पुरूष देखते हैं। • यह मरीज फोम स्क्लेरोथेरेपी प्रक्रिया के साथ एंडोवेनस लेजर एब्लेशन से गुजरकर सफलतापूर्वक पैर के विच्छेदन से बचने में सक्षम था, जो 20% मृत्यु का कारण बनता है।

फ़रवरी 2, 2024 - 18:31
15 सालो से वैरीकोज वेन्स समस्या से पिडीत मरीज के पैर बचाने में डॉक्टर को मिली सफलता

द स्वार्ड ऑफ इंडिया

कानपुर । पिछले १५ साल से वैरिकोज वेन्स समस्या से पिडीत ७२ वर्षीय मरीज के दाहिने पैर को बचाने में कानपूर के अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल के डॉक्टरों को सफलता हासिल हुई हैं।

अस्पताल के वैस्कुलर सर्जन डॉ. अचिंत्य शर्मा के नेतृत्व में अन्य एक डॉक्टर की टीम ने यह इलाज किया हैं।

पैर को बचाने के लिए मरीज पर फोम स्क्लेरोथेरपी प्रक्रिया की गई। सर्जरी के बाद अब मरीज पहले की तरह अपने दैनिक गतिविधिया करने लगा हैं।

अब्दुल माबूद एक मिल कर्मचारी हैं। वह पिछले कुछ सालो से त्वचा पर खुजली, पैरों में दर्द, सूजन से परेशान थे।

 उनके दाहिने पैरे में अल्सर था। कई अस्पतालो में इलाज करवाया लेकिन मरीज की समस्या कम नही हुई। स्थानिक डॉक्टरोने उन्हें घुटने से ऊपर का पैर काटने की सलाह दी।

कानपुर के अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल के वैस्कुलर सर्जन डॉ. अचिंत्य शर्मा ने कहॉं की, मरीज की वैद्यकीय जांच में उन्हें पैर में अल्सर का पता चला। भारत में वैरिकोज वेन्स एक आम समस्या है,

जो लंबे समय तक खड़े रहने के कारण लगभग हर सातवें पुरुष को प्रभावित करती है। समय पर उपचार न होने से अल्सर होने का खतरा रहता हैं।

यह समस्या आमतौर पर पुलिसकर्मी, गार्ड और मिल श्रमिकों में दिखाई देती हैं। इसी तरह, देश में लगभग हर चौथी महिला गर्भावस्था के बाद वैरिकाज़ नसों से प्रभावित होती है।

मैं प्रतिदिन वैरिकोज़ वेन्स वाले प्रत्येक 1 पुरुष मरीज के मुकाबले ३-४ महिलाओं को देखता हूँ। इस स्थिति के बारे में जागरूकता की कमी विभिन्न चरणों में गंभीर जटिलताओं को जन्म दे सकती है:

सूजन (चरण I), पैर का भारीपन (चरण ii), बढ़ी हुई नसें (चरण iii), नसें फटना और रक्तस्राव (चरण iv), और ठीक न होने वाले अल्सर (चरण V और VI)।” डॉ. शर्मा ने कहा, “मरीज को एक न्यूनतम इनवेसिव आउट पेशेंट प्रक्रिया से गुजरना पड़ा जिसे फोम स्क्लेरोथेरेपी के साथ एंडोवेनस लेजर एब्लेशन के रूप में जाना जाता है।

 यह प्रक्रिया, लगभग एक घंटे तक चली। सर्जरी के बाद उसी दिन मरीज को डिस्चार्ज दिया गया। इलाज के बाद अल्सर पूरी तरह से ठीक हो गया, जिससे पैर काटने की आवश्यकता समाप्त हो गई और संबंधित 20% मृत्यु दर कम हो गई।

इससे न केवल मरीज़ की शारीरिक सेहत में सुधार हुआ बल्कि उनके काम और सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा।” मरीज अब्दुल माबूद ने कहॉं की, “मैं पिछले १५ साल से अल्सर से पिडीत था।

 अल्सर के कारण मुझे काफी शर्मिंदा महसूस होता था। लेकिन अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल के डॉक्टरों के कारण मुझे नई जिंदगी मिली हैं। सर्जरी के बाद अब में अल्सर कम हो गया हैं। और डॉक्टरोंने मेरे पैरों को कटने से बचाया हैं। मेरी जान बचाने के लिए में डॉक्टर को धन्यवाद देता हुं।''

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