कांग्रेस की दूसरी सूची के साथ सपा ने उतारे उम्मीदवार भारी विरोध के बाद 3 टिकट बदले, कमलनाथ के गढ़ में महिलाओं को टिकट नही , भोपाल से रितेश सिन्हा की खास रिपोर्ट

कांग्रेस ने अपने दूसरी सूची जारी कर दी जिसमें विधानसभा चुनावों के लिए जारी सूची में 88 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की गई है

अक्टूबर 21, 2023 - 19:58
कांग्रेस की दूसरी सूची के साथ सपा ने उतारे उम्मीदवार   भारी विरोध के बाद 3 टिकट बदले, कमलनाथ के गढ़ में महिलाओं को टिकट नही , भोपाल से रितेश सिन्हा की खास रिपोर्ट

द स्वार्ड ऑफ़ इंडिया

मध्य प्रदेश में चुनाव का अपना रंग दिखने लगा है। कांग्रेस ने अपने दूसरी सूची जारी कर दी जिसमें विधानसभा चुनावों के लिए जारी सूची में 88 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की गई है।

दूसरी सूची के आने के बाद भारी असंतोष और मचे भारी बवाल को देखते हुए कांग्रेस ने अपने तीन उम्मीदवारों को पलट दिया। इसमें दतिया, गोटे गांव और पिछोर में पूर्व घोषित उम्मीदवारों का नाम पलट दिया गया है। 

अब दतिया से अवधेश नायक की जगह अब राजेंद्र भारती कांग्रेस का तिरंगा लेकर मैदान में उतरेंगे। उनका मुकाबला भाजपा के उम्मीदवार और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा से होगा। 

पूर्व विधायक राजेंद्र भारती गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को पहले भी चुनाव हरा चुके हैं, मगर पिछला चुनाव मामूली अंतर से हारे थे। दिमली विधानसभा से भाजपा के भारी-भरकम नेता, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, जिन्हें मुख्यमंत्री के संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है, उनके खिलाफ कांग्रेस की तरफ से रविंद्र तोमर को मैदान में उतारा गया है।

वहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की घेराबंदी करते हुए ग्वालियर सीट पर कांग्रेस ने सुनील शर्मा को मैदान में उतारा है। पिछोर क्षेत्र से शैलेंद्र सिंह का भारी विरोध के कारण टिकट काटते हुए अरविंद सिंह लोधी को उम्मीदवारी दी गई है। 

गोटेगांव से पूर्व विधानसभा नर्मदा प्रसाद प्रजापति का टिकट काटा गया था, भारी विरोध के बाद उन्हें पुनः उम्मीदवारी दी गई है।

कांग्रेस अध्यक्ष और केंद्रीय नेताओं सदन से सड़क तक महिला आरक्षण को लेकर लेकर लंबी-चौड़ी घोषणाएं की थी, जो कोरी बयानबाजी साबित हुई। मध्य प्रदेश में कमलनाथ के गढ़ में भी एक भी महिला को टिकट के लायक नहीं समझा गया। 

दिलचस्प बात है कि यह है कि कमलनाथ के सांसद पुत्र नकुल नाथ ने स्क्रीनिंग से पहले जिन तीन नामों की घोषणा की थी, उन सभी को टिकट मिल चुका है। उनके चहेतों में सोहन बाल्मीकि, कमलेश शाह और निलेश उइके को उम्मीदवारी मिलना इसका सबूत है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के प्रभाव वाले क्षेत्र में 7 विधानसभा सीटें हैं।

नारी सम्मान की घोषणा करने वाले कमलनाथ घोषणा नाथ ही साबित हुए हैं। वो अपने प्रभाव क्षेत्र में एक भी महिला को टिकट देने के लिए माना नहीं। हालांकि उनके घर में ही पूर्व सांसद अलका नाथ मौजूद हैं, मगर छिंदवाड़ा की महिला कार्यकर्ताओं ने नाम नाम छापने की शर्त पर बताया कि कमलनाथ सांसद नकुल नाथ की मां और पूर्व सांसद अलका नाथ को टिकट थमा देते तो नारी सम्मान क्रियान्वित हो जाती और कोटा पूरा हो जाता।

इन महिलाओं ने आक्रोश भरे शब्दों में कहा कि कमलनाथ अब अब घोषणा नाथ बन कर रह गए। उन्हीं के क्षेत्र में एक भी महिला उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में नहीं उतारने को भाजपा चुनावी मुद्दा बना सकती है। 

आपको बता दें कि 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 114 सीटें जीती थी और भाजपा 109 सीटों पर सिमट गई थी। कुछ दिन सरकार चलने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया को अलग-थलग रखने की कोशिशों में सिंधिया के साथ कई विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे और सरकार गिर गई थी।

सिंधिया के साथ विधायकों का एक बड़ा वर्ग भाजपा में शामिल हो गया और शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में फिर से मप्र में सरकार बन गई। फिलहाल भाजपा के 127 विधायक हैं। भाजपा ने अब अपने केंद्रीय नेताओं की लंबी-चौड़ी फौज चुनावी मैदान में उतार दी है। 

कमलनाथ ने दिखाई अखिलेश को औकात दिखा दी है। मध्य प्रदेश कांग्रेस में टिकट बंटवारे को लेकर सपा के दावे को सिरे से खारिज करते हुए अखिलेश-वखिलेश क्या कहकर सपा सुप्रीमो की औकात बता दी। सपा वहां 6 सीटों के लिए मनुहार कर रही थी।

अखिलेश के करीबी सूत्रों ने बताया कि 3 सीटों पर सपा प्रमुख मानने को तैयार थे, मगर कमलनाथ के अड़ियल रवैये ने अखिलेश को मध्य प्रदेश की राजनीति से दूर रखने की पूरी कोशिश की। अखिलेश ने अपने 35 उम्मीदवारों को मप्र में चुनाव लड़ावाने की घोषणा कर चुके हैं जो कांग्रेस की जीत का समीकरण बिगाड़ने के लिए काफी हैं। 

अखिलेश ने बयान दिया कि लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस को इंडिया गठबंधन के बारे में तय करना है कि यह राष्ट्रीय स्तर पर रहेगा कि प्रदेश स्तर पर। अगर आज गठबंधन प्रदेश स्तर पर नहीं होता है तो भविष्य में ही प्रदेश स्तर पर कोई गठबंधन नहीं होगा।

पिछले चुनावों के नतीजों को देखें तो सपा मध्य प्रदेश में 4 प्रतिशत वोटरों पर पर अपना असर रखती है। ऐसे में कांग्रेस की जीत का गणित बिगाड़ने में सपा की बड़ी भूमिका हो सकती है।

कांग्रेस ने बैठे-बिठाए भाजपा को बड़ा मौका दे दिया है। कांग्रेस में दिग्विजय और कमलनाथ की अंदरूनी घमासान के बीच सपा को मैदान में लाकर अखिलेश ने कांग्रेस का रास्ता रोकने का इंतजाम कर दिया है जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिलना तय है।

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