इंडिया गठबंधन से बाहर रहने पर फीकी पड़ सकती है बसपा की चमक

फिर तो अंगूठा दिखायेंगे टिकट के दावेदार

फ़रवरी 27, 2024 - 22:41
फ़रवरी 27, 2024 - 22:42

द स्वार्ड ऑफ इंडिया

उरई(जालौन)। इंडिया गठबंधन में समाजवादी पार्टी एवं कांग्रेस का सीट बंटवारा हो जाने के बाद प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की चमक फीकी पड़ सकती है।फिर तो अंगूठा दिखायेंगे टिकट के दावेदार

खासकर जालौन, गरौठा, भोगनीपुर लोकसभा क्षेत्र में पार्टी की स्थिति पिछले लोकसभा चुनावों के मुकाबले उलट हो सकती है। प्रदेश की राजनीति में अलग-थलग पड़ती दिख रही बसपा के लिए अकेले दम पर चुनाव लड़ना अब आसान नहीं माना जा रहा है। क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में जिस तरह से बसपा को एक सीट से संतोष करना पड़ा था

उससे बसपा के टिकट के लिए बोली बोलने वालों का अकाल पड़ सकता है। पिछले दिनों इंडिया गठबंधन के दो घटक कांग्रेस एवं समाजवादी पार्टी के बीच विरोधाभासी खबरों के चलते कांग्रेस एवं बसपा के गठबंधन की खबरों ने जोर पकड़ लिया था। राजनैतिक हलकों में यह चर्चा थी

कि लोकसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा के साथ ही कांग्रेस एवं बसपा गठबंधन का ऐलान हो जाए। लेकिन भारत जोड़ो न्याय यात्रा लेकर यूपी में प्रवेश करने के साथ ही अखिलेश यादव एवं राहुल गांधी ने जिस तरह से सीट बंटवारा पर सहमति व्यक्त कर गठबंधन का ऐलान किया उससे राजनैतिक समीक्षक भी हैरान रह गये। सपा, कांग्रेस का लोकसभा चुनाव में गठबंधन हो जाने के बाद अब प्रदेश की गठबंधन राजनीति से बसपा अलग-थलग पड़ती दिखाई दे रही है

और चुनावों की तारीखों के ऐलान के बाद भी बसपा अकेला चलती है। है तो फिर लोकसभा चुनाव में उसकी क्या हालत होती यह किसी से छिपी नहीं है। जहां तक जालौन गरौठा भोगनीपुर लोकसभा क्षेत्र की बात है तो जालौन जिले में बसपा के प्रमुख स्तम्भ विजय चौधरी पूर्व पालिकाध्यक्ष उरई ने सत्ता के दबाव में आकार भाजपा का पट्टा ओढ़ना पड़ा। जाहिर है निकाय चुनाव में गिरजा चौधरी की जीत के बाद से ब्लैक मेलर किस्म के भाजपाई उन्हें नगर का विकास नही करने दे रहे थे। यहां तक कि नगर पालिका परिषद उरई के बजट को घटाने के साथ ही उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित किया जा रहा था। तब नगर की जनता से किए पाये है। गए वादों को पूरा करने, नगर के एवं विकास को चार चांद लगाने केलिए चौधरी विजय चौधरी को भाजपा में शामिल थमाती होना पड़ा।

बसपा के लिए आगामी और लोकसभा चुनाव में विजय चौधरी कल को तुरूप का इक्का कहा जा रहा था के लिए क्योंकि वर्तमान में जालौन गरौठा कहे भोगनीपुर लोकसभा क्षेत्र से जिन चुनाव लोगों के नाम टिकट के दावेदारों के मुंह रूप में चर्चा है। उनमें पूर्व उपवन के संरक्षक बीआर अहिरवार एवं पूर्वकी मंडल कोआर्डर्डीनेटर सुरेशचंद्र गौतम जा रही प्रमुख रूप से है। यह ऐसे चेहरे नही बसपा कहे जा सकते जिनका पार्टी संभव कार्यकर्ताओ में ज्यादा प्रभाव हो और न ही इन्हे जिताऊ प्रत्याशी कहा जा न जाने सकता है।

 यह अलग बात जब क्योंकि बसपा के टिकट की बोली बोलने बैठना वाले नही आते है तो फिर झेंप मिटाने अधिक के लिए पार्टी सुप्रीमो उन्हें टिकट वर्ग थमा दें। क्योंकि इन दोनों चेहरों का आज जिले में न तो कोई सामाजिक और न बैंक के कोई राजनैतिक प्रभाव है। फिर भी में बसपा अगर अकेले दम पर चुनाव जो लड़ती है तो वह जालौन गरौठा क्षेत्र के में कांग्रेस की भूमिका में न आ जाये। क्योंकि कांग्रेस प्रत्याशियों को पिछले छिटकने कुछ चुनावों से लोकसभा चुनावों में उनके 80 हजार के आसपास वोट मिल उतार दें। अगर कहीं समाजवादी पार्टी कांग्रेस गठबंधन जिले के किसी समाज के नेता को टिकट है तो फिर बसपा की चमक भी फीकी पड़ सकती है। ऐसे में तक जो नेता बसपा के टिकट पार्टी के टिकट के बोलीदाता जाते थे वह बसपा के अकेले लड़ने की स्थिति में बसपा से चुराते नजर आ सकते है। बसपा टिकट बेचने वाले कोआडर्डीनेटरों हालत तो और भी पतली बतायी है। क्योंकि इंडिया गठबंधन में शामिल नही हो पाती है।तो है

 कि पार्टी के इन टिकट के कोआर्डीनेटरों को प्रत्याशी खोजने में कितने पापड़ बेलने पड़े। डूबते जहाज पर कोई नही चाहता। बसपा का जो सबसे नुकसान हुआ है वह पिछड़े का पार्टी से बिछड़ जाना रहा। बसपा के पास पार्टी के मूलवोट अलावा कुछ भी उसके पक्ष अच्छा नही दिख रहा है। पार्टी के मिशनरी नेता थे वह भी बसपा लालाराम अहिरवार जैसे कोआर्डीनेटरों के कारण भी पार्टी से को तैयार है।

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